इंसानों की उत्पत्ति कैसे हुई,इंसानों का जन्म कैसे हुआ ,जानें पूरा रहस्य
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| विकसित होता हुआ इंसान फाइल फोटो |
और ये प्रजाति मेमल्स की थी मेमल्स को स्तन धारी जीव भी कहा जाता है इन मेमल्स ने खुद को इस महा विनाश से बचा लिया था और अत्यंत गर्मी से बचने के लिए ये जमीन के अंदर रहने लगे और जिन्दा रहने के लिए उन्होंने सब कुछ खाना शुरू कर दिया |
इतने बड़े महा प्रलय के बाद एक बार फिर से धरती हरी भरी होने लगी थी और धरती पर जो 5 प्रतिशत जीव बचे थे उनमें अडॉप्टेड रेडिएशन की प्रक्रिया से बहुत सारी नई प्रजातियाँ जन्म लेने लगी इओसिन एपोक में साढ़े 5 करोड़ साल पहले जंगल में बन्दर जैसी प्रजाति आयी |
जिनकी आँखें सर में आगे की तरफ थी और इसी काल में प्राइमेट्स के सर के अंदर एक महत्व पूर्ण एवेलुएशन हुआ इनके स्पाइनल कोड को दिमाग से जोड़ने वाला छेद जिसे फॉर्मल मैगनम कहते हैं वह स्कल के पिछले हिस्से से सेन्टर की तरफ सिफ्ट होने लगा |
यानी इसके बाद जो प्रजाति आई वो सीधे चलने लगी इसी के साथ बता दें कि आज से करीब साढ़े चार करोड़ साल पहले धरती के वातावरण में बदलाव होने लगा और धरती के टेक्टोनिक प्लेट्स में हल चल होने लगी जो कि धरती दो बड़े महा दीपों को एक दूसरे के पास ले गई |
और आप लोगों को बता दें कि यह वही भाग हैं जहाँ आज हम रहते हैं जो कि इंडिया के नाम से जाना है और यह एशिया महादीप के तरफ तेजी से बढ़ रहा था और इन दोनों महादीप के आपस में टकराने से हिमालय जैसी पर्वत मालाएँ खड़ी होने लगीं और यह वही पर्वत माला है |
जिसे हम दुनिया की सबसे ऊँची चोटी जिसे आज हम माउंट एवरेस्ट के नाम से जानते हैं और यह पर्वत मालाए इतनी ऊँची थी कि इससे मौसम का पैटर्न बदलने लगा और जिससे पृथ्वी ठंडी होने लगी इस पर्वत श्रृंखला से गिरने वाला वर्फ आगे चल कर कई नदियों का निर्माण करने लगा |
और यह बही नदियाँ हैं जिनसे आज हमें पीने के लिए पानी मुहैया होता है अलिगोसीन इपोग में करीब 3 करोड़ साल पहले ग्लोवल कूलिंग हुई और घास के मैदान बढ़ने लगे और जंगल घटने लगे तब ऐसे जानबर विकसित हुए जो खुले मैदान में रहने के लिये उपुक्त थे |
और इन्ही में दूसरे जानबरों को खाने वाले जानबर भी विकसित होने लगे एक करोड़ साल पहले पृथ्वी वह रूप लेने लगी थी जिसे आज हम देख रहे हैं धरती पूरा वातावरण आज के समान दिखने लगा और धरती के लगभग सारे महादीप जाने पहचाने थे |
लेकिन परिस्थियाँ फिर बदलने लगी 40 लाख साल पहले धरती की टेक्टोनिक प्लेट्स में फिर एक बार फिर से हल चल हुई और अफ्रीका के पूर्वी इलाकों में एक नई पर्वत श्रखला का निर्माण हुआ और पर्वत श्रखला थी East African Rift
Valley इस पर्वत श्रखला के उभर जाने से यहां हरे भरे जंगलों में आने वाली मौसमी हवा का मानसून पूरी तरह से रुक गया |
जिसके कारण यहां के जंगलों में बारिश आना बंद हो गयी और यहीं इन्हीं जंगलों में रहते थे the great एब्स यही हैं हमारे काफी दूर के रिस्तेदार और इनको पेरोला के नाम से जाना जाता था और हमारे परिवार की शुरुआत इसी ग्रेट एब्स से हुई और ये पेरोला पेड़ों पर रहते थे |
और अपना पेट भरने के लिए फूल और फल खाते थे और वजनी होने के कारण ये एक डाल से दूसरी पर नहीं जा पाते थे इसीलिए ये हमेसा झूलते रहते थे और कभी कभी ये अपने दोनों पेरों से भी चलने लगते थे सीधे चलने छमता जमीन पर नहीं पेड़ की टहनियों से हुई |
और दो पेरों पर चलना इंसानों की नहीं वल्कि ऐब्स की खोज थी आगे चल कर ये ऐब्स जलवायु और जगह के अनुसार बदल गए कुछ चिम्पेंजी और गोरिला में विकसित हुए और कुछ इंसानों में विकसित होने लगे और वो पूरे अफ्रीका में फैले हुए थे |
लाखों साल के विकसित होने के बाद वारिश के बंद हो जाने के बाद वहाँ के जंगल सूख गए जिसका सबसे ज्यादा असर इन ऐब्स पर पड़ा और जंगल सूख जाने से इन ऐब्स के लिए खाने की समस्य उत्पन्न हुई और इसी लिए खाने के लिये पेड़ से उतर कर जमीन पर चलने लगे |
और इन प्रजाति के जानबरों को Ardipithicus Ramidus
के नाम से जाना जाने लगा और इनको हमारे पूर्वज भी कहा जाता है और जिन्होने मानव इतिहास में जमीन पर पहला कदम रखा और इन्हीं के कारण चाँद पर हमने अपना पहला कदम रखा |
इनका दिमाग एक संतरे जितना बड़ा था और इनकी लम्बाई केवल 4 फ़ीट थी ये हमारे वंस के जमीन पर चलने वाले सबसे पहले जीव थे कई हजार सालों के विकेशक्रम के बाद ये दो पेरों पर चलने लगे और इससे ऊर्जा काम खर्ज होती थी और ये चलते भी खा सकते थे |
और दो पेरों पर सीधा खड़ा होकर अब ये दूर दूर तक नजर रखने लगे समय के साथ -साथ विकास की प्रक्रिया चलती रही और ये जीव धीरे -धीरे विकास होने लगे और 23 लाख साल पहले हमारे पूर्वजों का दिमाग बड़ा हो गया था और ये थे Homo Hebilis और इन्होंने पहली बार पत्थर को हथियार के रूप में प्रयोग किया |
और समय बीतने के बाद अब ये Homo hebilis जानबरों का शिकार करने लगे और ये थे homo Erectus जो कि अन्य जानबरों से होशियार थे और इन्होंने ही सबसे पहले आग का इस्तेमाल करना शुरू किया और आग की खोज हमारे पूर्वजों के लिए सबसे बड़ी खोज थी |
और आग के कारण ही इन पूर्वजो ने मांस को पकाना सीखा और वो माँस को पकाकर खाने लगे जिसके कारण उनके अंदर कैलरी बढ़ने लगी और इनका दिमाग विकसित होने लगा और दो लाख पहले ही आज के इंसान ने अपना रूप ले लिया था मेरिंग्स यानि आवाज की जो नली हमारे पूर्वजों में गले के ऊपर थी वो नीचे आ गयी थी |
और वो अब जटिल आवाज निकाल सकते थे और उन्होने बोलना शुरू कर दिया था और पहली बार कोई जानकारी एक से दूसरे इंसान से तक पहुँचने लगी और यही वो आखरी विकासक्रम था जिसके बाद विकसित हो कर हम बने हम यानी होमो सेपियंस |

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